Jul 28, 2011

फतेहपुर : 48वीं बार में जब्बार पास हो ही गए मैट्रिक

कहते हैं-

‘सीढ़ियां उनके लिए बनी हैं जो छत पर जाना चाहते हैं, 
है आसमां पे जिनकी नजर, उन्हें रास्ता खुद बनाना है।’ 

कुछ ऐसा ही जज्बा लिए जब्बार जब ने 48वीं बार हाईस्कूल की परीक्षा दी और ऊपर वाले ने भी पूरा करम बख्शा। आखिर 68 वर्ष की उम्र में उनका मैट्रिक पास होने का सपना पूरा हो गया। बुधवार को कालेज के प्रधानाचार्य ने उन्हें पास होने का प्रमाणपत्र लेने के लिए बुलवाया तो खुशी से उनकी आंखें छलक उठीं। वह जोश से कहते हैं कि कुछ आर्थिक मदद मिले तो वह आगे भी पढ़ना जारी रखेंगे।

डीघ गांव निवासी जब्बार बेहद गरीब हैं। फुटपाथ पर जूते-चप्पल बेचकर अपने परिवार की जीविका चलाते हैं। 15 वर्ष की अवस्था में उनका निकाह हुआ था। उस समय उनमें पढ़ने का जुनून था। कामकाज न करने के कारण पत्नी ने तलाक दे दिया। 20 वर्ष की उम्र में पहली बार वह हाईस्कूल की परीक्षा में बैठे। अपनी मेहनत और बिना नकल पास होने की हसरत लिए पिछले 48 साल से वह लगातार बोर्ड परीक्षा का फार्म भरते चले आ रहे थे। 48वीं बार उन्हें सफलता मिली।



जब्बार हुसेन ने वर्ष 1963 में नगर के नेहरू इंटर कालेज में विज्ञान वर्ग से संस्थागत परीक्षार्थी के रूप में पहली बार हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। तब वह हिंदी के अलावा सभी चार विषयों में फेल हो गये थे। इसके बाद से उन्होंने विज्ञान वर्ग छोड़कर कला वर्ग से व्यक्तिगत परीक्षा देना शुरू किया। दुर्भाग्य रहा कि तब से हर साल फेल होते आ रहे हैं। वर्ष 2010 की परीक्षा में हिंदी, सामाजिक विज्ञान व कला में पास हो गये थे। जबकि अंग्रेजी, प्रारंभिक गणित व विज्ञान में फेल हो गये थे। रिजल्ट अनुत्तीर्ण रहा था। इस वर्ष उन्होंने केवल अंग्रेजी, प्रारंभिक गणित व विज्ञान की परीक्षा दी थी। जब्बार का रिजल्ट विचाराधीन आया था। प्रमाण पत्र सह अंकपत्र आने पर विज्ञान में 35 अंक मिले हैं। प्रारंभिक गणित में 28 अंक हैं। इसमें 5 नंबर का ग्रेस मिल जाने पर इसमें उत्तीर्ण मान लिये गये। इसके बाद अंग्रेजी में केवल एक अंक मिला है। चूंकि एक विषय में फेल को पास माने जाने की व्यवस्था है। इसके तहत जब्बार उत्तीर्ण हो गये। प्रधानाचार्य ने बताया कि जब्बार रिगुलेशन 17(1) चैप्टर 12 के तहत हाईस्कूल परीक्षा 2011 में पास हो गये हैं। 

बुधवार को नगर के दयानंद इंटर कालेज के प्रधानाचार्य ओम प्रकाश वाजपेई ने बुजुर्ग जब्बार को गांव से बुलवाकर प्रमाणपत्र दिया तो खुशी से उनकी आंखों में आंसू आ गए। बच्चों ने उनके जज्बे को सलाम करते हुए तालियों की ध्वनि से बधाई दी।
(समाचार साभार : अमर उजाला फतेहपुर )

2 comments:

  1. वाह! क्या बात है। इस जज्बे को सलाम!

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  2. अच्छी जानकारी हाफ़ सैंचुरी रह गयी

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