18/05/2014

फतेहपुर भी मोदी लहर मे सवार : कमल ने परचम लहराया

लोकसभा परिणाम

फतेहपुर के संसदीय इतिहास में पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के बाद भाजपा प्रत्याशी साध्वी निरंजन ज्योति ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की। बसपा के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी की प्रतिष्ठा से जुड़ी इस सीट पर प्रतिद्वंद्वियो
ं को मुंह की खानी पड़ी। हालांकि बसपा के प्रत्याशी अफजल सिद्दीकी व सपा के निवर्तमान सांसद राकेश सचान अपनी जमानत बचाने में कामयाब रहे। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी ऊषा मौर्या 4.39 फीसद मतों के साथ अपनी जमानत भी गवां बैठी।

इस बार के संसदीय चुनाव में मोदी लहर के सहारे साध्वी निरंजन ज्योति सबको पीछे छोड़ते हुए बड़ी जीत दर्ज की। साध्वी को 45.89 फीसद मत हासिल हुए। वहीं बसपा प्रत्याशी अफजल सिद्दीकी को मात्र 28.22 प्रतिशत मतों से संतोष करना पड़ा। सपा प्रत्याशी व निवर्तमान सांसद राकेश सचान को 16.99 फीसद मत मिले तो कांग्रेस प्रत्याशी अपनी जमानत भी गवां बैठी। उन्हें मात्र 4.39 फीसद मत मिले।



विधानसभा परिणाम

वहीं सदर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी विक्रम सिंह ने बसपा प्रत्याशी जीतेंद्र लोधी को 12,509 मतों से हराकर फतह हासिल की। पूरी हुई मतगणना में सपा तीसरे तो कांग्रेस प्रत्याशी चौथे स्थान पर रहे। सदर विधानसभा उपचुनाव में मोदी लहर के सामने अन्य दलों के प्रत्याशी टिक नहीं पाए। भाजपा प्रत्याशी द्वारा बनाई गई बढ़त को कोई अंतिम दम तक छू नहीं सका। 

अंतिम राउंड की मतगणना में भाजपा प्रत्याशी श्री सिंह ने 70,789 मत हासिल करके बसपा प्रत्याशी को 12,509 मतों से शिकस्त दी। विधायक रहे स्व. सैय्यद कासिम हसन की विरासत को संभालने उतरे सपा प्रत्याशी सैय्यद आबिद हसन चुनावी नैया नहीं पार कर पाए। 50,101 मत पाकर तीसरे नंबर पर रहे। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र सिंह 11,282 मत पाकर चौथे स्थान पर रहे। जिला निर्वाचन अधिकारी अभय ने देरशाम भाजपा प्रत्याशी की घोषणा की।


प्रत्याशियों को मिले कुल मत पार्टी प्रत्याशी हासिल मत
भाजपा विक्रम सिंह 70,789
बसपा जीतेंद्र लोधी 58,280
सपा सै. आबिद 50,101
कांग्रेस राजेंद्र सिंह 11,282
निर्दल अवधेश गुप्त 909
निर्दल मनोज त्रिवेदी 729
निर्दल जीपी लोधी 578
निर्दल प्रमोद कुमार 589
निर्दल मनोज कुमार 1576

09/02/2014

हम रहें न रहें ‘अनुकाल’ बताती रहेगी इतिहास : 'अनुकाल' का हुआ विमोचन

स्वर्णिम इतिहास को संजोए कृति अनुकाल का विमोचन जब मूर्धन्य शिक्षाविदों ने किया तो समूचा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। बच्चों द्वारा पेश किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रम ने आयोजन में चार चांद लगा दिए। ऐतिहासिक पुस्तक को स्वरूप देने वालों के मुंह से सहसा निकल आया कि हम रहें न रहें यह किताब इतिहास बताती रहेगी।

शहर से सटे रमवां गांव के कोटेश्वर इंटर कॉलेज में शनिवार को ऐतिहासिक घटनाओं को समेटने वाली पुस्तक अनुवाक का अक्षय साहित्य कला केंद्र अमौली के तत्वावधान में अक्षय ग्रंथ माला के द्वितीय पुष्प के रूप में प्रकाशित जनपद के पुरातत्व, इतिहास, साहित्य, संस्कृति एवं कला को अपने कलेवर में समेटे हुए अनुकाल ग्रंथ अनुकाल का विमोचन हुआ। पुरातत्व, इतिहास, साहित्य एवं कला के कलेवर को समेटे ग्रंथ को वस्त्र से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विवि. के इतिहास विभाग के प्रोफेसर रवींद्र कुमार और दिल्ली विवि. के दर्शन शास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. दीपक कुमार त्रिवेदी द्वारा किया गया। पीत वस्त्र में लिपटी पुस्तक को ज्योंही बाहर निकाला बच्चों और उपस्थित जन समुदाय ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया। विद्यालय के बच्चों द्वारा पेश किया गया सांस्कृतिक कार्यक्रम ने भी जमकर तालियां बटोरी।

प्रधान संपादक डॉ. ओम प्रकाश अवस्थी, सह संपादक श्रीकृष्ण त्रिवेदी एवं डॉ. बालकृष्ण पाण्डेय ने संकलन, उद्देश्य एवं पुस्तक के महत्व पर प्रकाश डाला। पुस्तक की रचना में उठाई गई समस्या का जिक्र भी किया। मुख्य अतिथि डॉ. त्रिवेदी ने सारगर्भित वक्तव्य में कहाकि मिट्टी की गंध को जांचने परखने में यह मार्गदर्शक बनेगी। डॉ. रवींद्र कुमार ने कहाकि पुस्तक के संकलन और प्रकाशन की भूरि भूरि सराहना की। पूर्व आईएएस अवधेश कुमार राठौर, इलाहाबाद विवि. वनस्पति विभाग के विभागाध्यक्ष संदीप मेहरोत्रा आदि रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी विज्ञानानंद जी महराज ने की। विद्यालय के प्रबंधक कोटेश्वर शुक्ल ने आगंतुकों का आभार प्रकट किया। साहित्यकारों में धनंजय अवस्थी, शिवशरण सिंह अंशुमाली, बृजेंद्र अग्निहोत्री, डॉ. अपूर्व सेनराज आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर अनूप शुक्ल ने किया।




खबर साभार : अमर उजाला 








07/02/2014

फतेहपुर के इतिहास और संस्कृति का नया सन्दर्भ ग्रन्थ ‘अनुकाल’ : 'अनुवाक' के बाद अगला बड़ा प्रयास

  • साहित्य, संस्कृति व पुरातत्व का आइना बनेंगी 'अनुकाल'
  • 8 फरवरी को है विमोचन @ कोटेश्वर इंटर कालेज, रमवाँ
  • डा.ओमप्रकाश अवस्थी के संयोजकत्व में ' अनुकाल तैयार
  • अनुवाक' के बाद निजी प्रयासों से जिले के संकलित इतिहास का दूसरा भाग
  • अनुकाल के पहले खंड में पुरातत्व, इतिहास, मूर्तिकला के 29 लेख
  • दूसरे खंड में अकबर के कार्यकाल से साहित्य के क्षेत्र में जिले की तस्वीर स्पष्ट की गई
  • तीसरे व अंतिम खंड में संस्कृति एवं कला को पिरोया गया


संकलित इतिहास के अभाव से जूझ रहे जनपदवासियों के हाथ ‘अनुकाल’ का संग्रह जल्द ही आ जाएगा। तीन खंडों की इस पुस्तक में साहित्य, संस्कृति व पुरातत्व का आइना बनेंगी। पुस्तक का विमोचन आठ फरवरी को कोटेश्वर इंटर कालेज रमवां में इग्नू के इतिहास विद करेंगे। अक्षय साहित्य कला केंद्र शिक्षाविद डा.ओमप्रकाश अवस्थी के संयोजकत्व में 'अनुवाक' के बाद जिले के संकलित इतिहास का दूसरा भाग अनुकाल तैयार किया है। 

महात्मा गांधी महाविद्यालय के सेवानिवृत हिंदी विभागाध्यक्ष श्री अवस्थी ने पत्रकार वार्ता में बताया कि अनुकाल के पहले खंड में पुरातत्व, इतिहास, मूर्तिकला के 29 लेख है, जिसका संपादन कृष्ण कुमार चौरसिया ने किया है। दूसरे खंड में अकबर के कार्यकाल से साहित्य के क्षेत्र में जिले की तस्वीर स्पष्ट की गई है, इसका संपादन श्रीकृष्ण कुमार त्रिवेदी ने किया है। तीसरे व अंतिम खंड में संस्कृति एवं कला को पिरोया गया है। संपादन डा.बालकृष्ण पांडेय ने करते हुए रामलीला व ताजियों के इतिहास को संकलित किया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक को सर्वमान्य बनाने के लिए गजेटियर सहित अन्य प्राचीन दस्तावेजों को साक्ष्य बनाया गया है। संकलित इतिहास देकर उन्होंने जिले का कर्ज उतारने का प्रयास किया है।





16/12/2013

‘माटी से माटी’ कार्यक्रम - 2013 सम्पन्न : ओम घाट से Pictures Live !

भिटौरा स्थित ओमघाट में माटी से माटी अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। स्वामी विज्ञानानंद की प्रेरणा विगत कई वर्षो से होने वाले समारोह में इस बार देश के विभिन्न हिस्सों से आई  शख्सियतों को अभिनंदन एवं सम्मान किया गया। 

यह ऐसी प्रतिभाए हैं जो अपने कार्यक्षेत्र में एक मुक्कमल स्थान बनाकर अपनी माटी की खुशबू बिखेर रहे हैं। जनपदीय विभूति अलंकरण समारोह के समापन सम्मानित विभूतियों के भोजन की व्यवस्था थी।  देश के कोने-कोने से आए फतेहपुरी व उनके परिवारिक नैसर्गिक छटा को निहारते हुए ओम घाट के आसपास गिरि, कंदराओं व गंगा किनारे डूबते सूरज की अनुपम छटा को निहारते रहे। दुग्ध धवल धारा के साथ कलकल करती पतित पावनी गंगा के तट पर विभूतियों का संगम बन गया। भगवान भाष्कर ने अंगड़ाई के साथ सम्मान समारोह स्नेह की लड़ियों के साथ सूर्य की लालिमा के साथ इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। मंद हवा के झोंकों के साथ खिले व्यक्तित्व के चेहरों के हाथों में सम्मान आया तो सम्मान करने वालों और पाने वालों में खुशी का ठिकाना न रहा।

उत्तर वाहिनी गंगा तट में आयोजित जनपदीय गौरवशाली व्यक्तित्व अलंकरण समारोह रविवार को आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गैर जनपदों और प्रांतों में सेवाएं दे रहे प्रतिभाओं ने कार्यक्रम में शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत आयोजक स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती के उद्बोधन से हुई। जिले की धरती में पले बढ़े लोगों के आने का सिलसिला सुबह से ही शुरु हो गया था। आयोजन समिति की ओर से एक रुद्राक्ष माला, पुष्प गुच्छ, प्रतीक चिन्ह ओम और पगड़ी पहना कर विभूतियों को सम्मानित किया गया।
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